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हम और ज़िंदगी
खामोश ग़म: फ़ुरकान एस ख़ान की उदासी पर क़िता | Silent Sorrow Hindi Qita
फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा रचित 'खामोश ग़म' एक मार्मिक क़िता है जो दिल में छुपे दर्द और बेबसी को बयां करती है। उदासी और तन्हाई पर सुंदर हिंदी कविता।
Sunday, August 23, 2026
https://mail.vews.in/खामोश-ग़म
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“खामोश ग़म: फ़ुरकान एस ख़ान की उदासी पर क़िता | Silent Sorrow Hindi Qita”
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23 August 2026
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"
Qita By Furkan S Khan
आँखों में नमी है, लबों पर हंसी है,
हर साँस में मेरी इक दर्द-ए-कमी है।
कहना चाहूँ जो, वो बात दबी सी है,
ये कैसी ज़िंदगी, बस इक बेबसी है।
Kaafiya: हंसी, कमी, बेबसी
Radeef: है
"
Qita By Furkan S Khan
सूरज ढला और शाम उतर आई है,
दिल में फिर से इक उदासी छाई है।
कोई समझे न इस दर्द की गहराई,
ये ग़म की परछाई है, जो साथ लाई है।
Kaafiya: आई, छाई, गहराई, लाई
Radeef: है
"
Qita By Furkan S Khan
भीड़ में भी अक्सर अकेलापन सताता है,
हर खुशी का पल भी अब रुलाता है।
क्या बताऊँ तुम्हें, दिल कितना घबराता है,
ये अनकहा दर्द बस भीतर ही खाता है।
Kaafiya: सताता, रुलाता, घबराता, खाता
Radeef: है
खामोश ग़म
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: हंसी, कमी, बेबसी
Radeef: है
आँखों में नमी है, लबों पर हंसी है,
हर साँस में मेरी इक दर्द-ए-कमी है।
कहना चाहूँ जो, वो बात दबी सी है,
ये कैसी ज़िंदगी, बस इक बेबसी है।
हर साँस में मेरी इक दर्द-ए-कमी है।
कहना चाहूँ जो, वो बात दबी सी है,
ये कैसी ज़िंदगी, बस इक बेबसी है।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: आई, छाई, गहराई, लाई
Radeef: है
सूरज ढला और शाम उतर आई है,
दिल में फिर से इक उदासी छाई है।
कोई समझे न इस दर्द की गहराई,
ये ग़म की परछाई है, जो साथ लाई है।
दिल में फिर से इक उदासी छाई है।
कोई समझे न इस दर्द की गहराई,
ये ग़म की परछाई है, जो साथ लाई है।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: सताता, रुलाता, घबराता, खाता
Radeef: है
भीड़ में भी अक्सर अकेलापन सताता है,
हर खुशी का पल भी अब रुलाता है।
क्या बताऊँ तुम्हें, दिल कितना घबराता है,
ये अनकहा दर्द बस भीतर ही खाता है।
हर खुशी का पल भी अब रुलाता है।
क्या बताऊँ तुम्हें, दिल कितना घबराता है,
ये अनकहा दर्द बस भीतर ही खाता है।
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