इश्क का नशा

Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: नशा, वफ़ा, जुदा, सदा

Radeef: है


मोहब्बत का असर कुछ यूँ गहरा है,
तेरे इश्क़ में डूबा दिल मेरा है।
वो बातें, वो मुलाक़ातें, वो हँसी,
यादों में तेरी हर लम्हा बसा है।

तेरी आँखों में वो कशिश, वो अदा,
खो गया हूँ मैं, ये कैसा नशा है।
हर पल तुझे पाने की चाहत है,
तुझसे बिछड़ना अब गवारा नहीं है।

तू ही मंज़िल, तू ही रास्ता है,
तेरे बिना जीना मुश्किल हुआ है।
मेरी हर दुआ में बस तू ही है,
मेरी मोहब्बत तुझपे कुर्बान सदा है।



Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: साज़, अंदाज़, राज़, आवाज़

Radeef: है


तेरी यादों का एक मीठा सा अहसास,
मेरे दिल में बजता कोई प्यारा सा साज़ है।
तेरी बातों में वो कशिश, वो अंदाज़,
जैसे कोई अनकहा, अनसुलझा राज़ है।

जबसे तू मिली है, दुनिया बदली सी लगती है,
हर पल तेरी जुदाई का डर सताता है।
पर तेरे होने का एहसास सुकून देता है,
यह दिल की धड़कन, तेरी ही तो आवाज़ है।

चाँद भी फीका लगे तेरे सामने, मेरे यार,
तेरी हँसी में छुपा सारा संसार है।
तू ही मेरा सब कुछ, तू ही मेरा प्यार,
तुझसे ही रोशन मेरा हर ख़्वाब ख़ास है।