इश्क़ का समंदर
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: नज़र, जिगर, असर
Radeef: पर
तेरे हुस्न का जादू चला है जिगर पर,
हर पल तेरी याद आती है मेरे दिल-ए-बेखबर पर।
खो गया हूँ तेरे प्यार की गहराइयों में,
ढूँढता हूँ तुझे हर ख़्वाब, हर एक नज़र पर।
ये कैसी कशिश है तेरी, क्या है तेरा असर,
जीना मुश्किल हुआ तेरे बिन, ओ मेरे हमसफ़र।
हर पल तेरी याद आती है मेरे दिल-ए-बेखबर पर।
खो गया हूँ तेरे प्यार की गहराइयों में,
ढूँढता हूँ तुझे हर ख़्वाब, हर एक नज़र पर।
ये कैसी कशिश है तेरी, क्या है तेरा असर,
जीना मुश्किल हुआ तेरे बिन, ओ मेरे हमसफ़र।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: साँसें, आसें, प्यासें
Radeef: हैं
मेरी हर साँसें तेरे नाम की माला जपें हैं,
तुझसे ही मेरी दुनिया, तुझसे ही आसें हैं।
तेरी यादों में खोया, दिल प्यासा-प्यासा है,
तू ही मेरा सब कुछ, तू ही मेरी जान हैं।
दूर तुझसे कैसे रहूँ, ये दूरियाँ काँटें हैं,
तेरे बिन जीना अब, बस एक सज़ा ही हैं।
तुझसे ही मेरी दुनिया, तुझसे ही आसें हैं।
तेरी यादों में खोया, दिल प्यासा-प्यासा है,
तू ही मेरा सब कुछ, तू ही मेरी जान हैं।
दूर तुझसे कैसे रहूँ, ये दूरियाँ काँटें हैं,
तेरे बिन जीना अब, बस एक सज़ा ही हैं।