उठो और चमको
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: राहें, बाहें, निगाहें
Radeef: सजाएं
अंधेरी रात है, पर सुबह की आस है,
अपने सपनों की मंज़िल को तुम तलाश है।
गिर के उठना, फिर से चलना, ये ही तो ज़िंदगी की राहें,
हिम्मत से थाम लो दुनिया की बाँहें,
और अपनी मंज़िल को तुम निगाहें सजाएं।
अपने सपनों की मंज़िल को तुम तलाश है।
गिर के उठना, फिर से चलना, ये ही तो ज़िंदगी की राहें,
हिम्मत से थाम लो दुनिया की बाँहें,
और अपनी मंज़िल को तुम निगाहें सजाएं।
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: तूफान, अरमान, पहचान
Radeef: बनाएं
भले ही राह में आए कोई तूफान,
अपने दिल के बुझे हुए अरमान।
हर मुश्किल को पार कर, अपनी खुद की पहचान,
अपने हौसलों से अपनी दुनिया तुम बनाएं।
अपने दिल के बुझे हुए अरमान।
हर मुश्किल को पार कर, अपनी खुद की पहचान,
अपने हौसलों से अपनी दुनिया तुम बनाएं।
Nazm By Furkan S Khan
Kaafiya: आसमान, अनजान, सम्मान
Radeef: पाएं
डर को छोड़ो, खोलो पंख, भरो नई उड़ान,
खुला है तुम्हारे लिए ये सारा आसमान।
अज्ञात राहों पर चलो, बिना किसी अंजान,
मेहनत से दुनिया में अपना नाम और सम्मान पाएं।
खुला है तुम्हारे लिए ये सारा आसमान।
अज्ञात राहों पर चलो, बिना किसी अंजान,
मेहनत से दुनिया में अपना नाम और सम्मान पाएं।