उदासी का साया
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: आँसू, जुदाई
Radeef: है
जब दिल में गम का सैलाब उमड़ता है,
हर लम्हा आँखों से आंसू बहता है।
ये दर्द भरा आलम कब तक सहेगा,
हर पल तेरी जुदाई का सताता है।
हर लम्हा आँखों से आंसू बहता है।
ये दर्द भरा आलम कब तक सहेगा,
हर पल तेरी जुदाई का सताता है।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: अकेला, तन्हा
Radeef: है
रात की खामोशी में जब कोई साथ नहीं होता,
हर लम्हा खुद को मैं अकेला पाता हूँ।
ये दिल की बेचैनी, ये मन का सूनापन,
इस दुनिया में मैं खुद को तन्हा पाता हूँ।
हर लम्हा खुद को मैं अकेला पाता हूँ।
ये दिल की बेचैनी, ये मन का सूनापन,
इस दुनिया में मैं खुद को तन्हा पाता हूँ।
Qita By Furkan S Khan
Kaafiya: यादें, बातें
Radeef: है
जब बीते हुए कल की यादें सताती हैं,
मन में एक अजीब सी उदासी छा जाती है।
वो गुज़रे हुए लम्हे, वो अनकही बातें,
सब कुछ बिखरा हुआ सा लगता है।
मन में एक अजीब सी उदासी छा जाती है।
वो गुज़रे हुए लम्हे, वो अनकही बातें,
सब कुछ बिखरा हुआ सा लगता है।