तन्हाई का दर्द

Shayari By Furkan S Khan

Kaafiya: अकेला, मेला

Radeef: हूँ


इस भीड़ में भी तन्हा खड़ा हूँ,
जैसे कोई रास्ता भूला हुआ हूँ।
हर चेहरा अजनबी सा लगता है,
इस दुनिया के मेले में अकेला हूँ।



Shayari By Furkan S Khan

Kaafiya: कहानी, निशानी

Radeef: है


लबों पे हँसी है, पर दिल में उदासी है,
आँखों में छुपी एक अनकही कहानी है।
यादों की हर आहट में तेरी ही निशानी है,
ये खामोशी भी तेरी मेहरबानी है।



Shayari By Furkan S Khan

Kaafiya: ज़िंदगी, बंदगी

Radeef: है


हर खुशी रूठी सी लगती है,
जैसे अधूरी सी कोई ज़िंदगी है।
मोहब्बत की राहों में ठोकर लगी है,
बची बस अश्कों की बंदगी है।