प्रेम का अनमोल सफर
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: राह, पनाह, आह, निगाह, गुनाह, चाह, वाह
Radeef: है
दिल को जो तेरी यादों की बस एक राह है।
इस दर्द में भी मुझको मिली एक पनाह है।
लब पर न आए कभी, वो खामोश आह है।
तेरी हर एक अदा पर मेरी हर निगाह है।
इश्क़ में डूबा हूँ, ये मेरा हर गुनाह है।
तेरे सिवा किसी और की अब कहाँ चाह है।
तेरी हर बात में मुझको मिलती एक वाह है।
ये कैसा मेरा इश्क़, कैसी ये निबाह है।
इस दर्द में भी मुझको मिली एक पनाह है।
लब पर न आए कभी, वो खामोश आह है।
तेरी हर एक अदा पर मेरी हर निगाह है।
इश्क़ में डूबा हूँ, ये मेरा हर गुनाह है।
तेरे सिवा किसी और की अब कहाँ चाह है।
तेरी हर बात में मुझको मिलती एक वाह है।
ये कैसा मेरा इश्क़, कैसी ये निबाह है।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: दिल, हासिल, साहिल, मुश्किल, क़ाबिल, शामिल
Radeef: है यार
तेरी मुहब्बत में डूबा ये मेरा दिल है यार।
इस इश्क़ में अब मुझे हर ख़ुशी हासिल है यार।
नज़रें मिलें तो लगे जैसे मिल गया साहिल है यार।
तेरे बिन हर राह, हर कदम अब मुश्किल है यार।
तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरी हर उम्मीद है।
तेरे सिवा और कोई न अब तो क़ाबिल है यार।
ये कैसी दीवानगी, कैसा ये है जुनून।
तेरी चाहत में हर पल मेरा शामिल है यार।
इस इश्क़ में अब मुझे हर ख़ुशी हासिल है यार।
नज़रें मिलें तो लगे जैसे मिल गया साहिल है यार।
तेरे बिन हर राह, हर कदम अब मुश्किल है यार।
तू ही मेरी मंज़िल, तू ही मेरी हर उम्मीद है।
तेरे सिवा और कोई न अब तो क़ाबिल है यार।
ये कैसी दीवानगी, कैसा ये है जुनून।
तेरी चाहत में हर पल मेरा शामिल है यार।