प्रेम की महक

Qita By Furkan S Khan

Kaafiya: घुली, जली, मिली

Radeef: है


प्रेम की महक हर साँस में घुली है,
ये वो आग है जो दिल में जली है।
हर पल नया एहसास ये देती है,
रूह की गहराइयों तक ये मिली है।



Qita By Furkan S Khan

Kaafiya: जब, तब, अब

Radeef: से


इश्क़ का चिराग़ जला है जब से,
रोशन हुई हर राह तब से।
अंधेरे सारे मिट गए पल भर में,
ज़ीस्त को मिली है पहचान अब से।