हिम्मत न हार
Shayari By Furkan S Khan
Kaafiya: चलता, समझता, गढ़ता
Radeef: रह
मंज़िलों को पाने की चाहत में, तू हरदम चलता रह,
गिरकर उठना, उठकर चलना, बस इतना समझता रह।
ज़िंदगी की राहों में कभी, तू हिम्मत न हारना,
अपनी मेहनत से तू हर पल, नया इतिहास गढ़ता रह।
गिरकर उठना, उठकर चलना, बस इतना समझता रह।
ज़िंदगी की राहों में कभी, तू हिम्मत न हारना,
अपनी मेहनत से तू हर पल, नया इतिहास गढ़ता रह।
Shayari By Furkan S Khan
Kaafiya: छोड़ना, तोड़ना, जोड़ना, मोड़ना
Radeef: न
अंधेरों से डरकर कभी, अपनी राह न छोड़ना,
दिल में जो लौ जल रही, उसे कभी न तोड़ना।
तू ही है अपनी क़िस्मत का, ख़ुद ही से नाता जोड़ना,
हर मुश्किल को पार कर तू, एक नया सवेरा मोड़ना।
दिल में जो लौ जल रही, उसे कभी न तोड़ना।
तू ही है अपनी क़िस्मत का, ख़ुद ही से नाता जोड़ना,
हर मुश्किल को पार कर तू, एक नया सवेरा मोड़ना।
Shayari By Furkan S Khan
Kaafiya: तूफ़ान, इंसान, आसान, पहचान
Radeef: बन जा
वक़्त की लहरों से लड़कर, तू तूफ़ान बन जा,
हर चुनौती को पार कर, एक नया इंसान बन जा।
जो आज मुश्किल लग रहा, कल वो आसान बन जा,
अपनी लगन से तू ही, अपनी पहचान बन जा।
हर चुनौती को पार कर, एक नया इंसान बन जा।
जो आज मुश्किल लग रहा, कल वो आसान बन जा,
अपनी लगन से तू ही, अपनी पहचान बन जा।