मैं देख रहा हूँ कई सारे लोग सहर अफशां (Sahar Afsha) द्वारा फ़िल्म इंडस्ट्री छोड़ अल्लाह की तरफ रुजू करने पर ऐतरजात के पुल बांधे जा रहे हैं, जैसा कि वो कह रहे पहले अय्याशी कर के अब हज को चलीं हैं, व साथ साथ फैशन ट्रेंड के नाम कई तरह की अपवाद बातें बनाई व बताई जा रही है, सबसे पहले तो मैं यू कहूंगा इस मरहले में सबसे पहली कड़ी दंगल गर्ल जायरा वसीम रहीं हैं उसके बाद सना खान और इन दोनों के बाद कहीं न कहीं एक अच्छा पॉजिटिव संदेश फ़िल्म इंडस्ट्री व दीगर फ़हशी इंडस्ट्रीज से जुड़ी महिलाओं में गया कि अगर वो वापिस आना चाहती हैं तो ज़्यादा मुश्किल नही है बल्कि लोग आपका स्वागत करने को तैयार हैं, और आप वापिस से एक बेहतर व इज़्ज़त योग्य ज़िन्दगी गुज़ार सकतीं हैं, वहीं दूसरी तरफ ये संदेश भी गया की इस तरह की इंडस्ट्रीज से जुड़ी महिलाएं गौर व फिक्र करें कि व गुनाहों के दलदल में किस हद तक मुब्तिला हैं ।
मैं आपको एक वाक्या बताता हूँ उसे जेहन में रखियेगा लेकिन पहली बात ये जान लीजिए ये मुस्लिम लड़कियों जो शोबिज में जातीं क्या उन्हें मुकम्मल इल्म भी होता है इस्लाम क्या है व आख़िरत क्या है ? अगर आपको लगता है सच मे इल्म के बाद ये शोबिज में गयी तो कहीं न कहीं हमारा व आंकलन गलत हो सकता है, मैं नही कहता कि सारी लडकिया ला-इल्मी में गयीं बल्कि ज़्यादातर कहा जा सकता है, पड़ोसी मुल्क जिसे इस्लामिक मुल्क कहा जाता है और निःसन्देह मुस्लिम देश है तो ज़ाहिरी कल्चर भी मुस्लिमों का ही होगा, अभी हाल ही में एक यूटूबर ने पार्क में डांस कर टिकटॉक बनाने वाले नौजवान लड़कों से सवाल जवाब किया, जिसे देख सुन कर आप सन्न रह जाएंगे कि ये बच्चे मुस्लिम कंट्रीज के हैं व मुसलमान हैं, पहला सवाल जो एक नौजवान से किया गया वो ये था कि नमाज़ ज़ुहर में कितनी रकाअत फर्ज है ? आप कल्पना कर सकते ऐसे आसान सवाल पर वो लड़का खामोशी से बेशर्मों की तरह खड़ा रहा और फिर दुबारा सवाल पूछने पर उसने साफ कहा मुझे इन सब चीजों का इल्म नही है मुझे बस ये पता है मुझे एक्टिंग करनी है डांस करना है, उसके बाद उस यूटूबर ने उन्हें बहुत समझाया बतलाया कि ये नाकाबिले यक़ीन है कि आप एक मुसलमान होते हुए ऐसा बोल रहे हैं, कहने का मतलब आज के दौर में ये कल्पना कर पाना मुश्किल है कि इतनी बेसिक नॉलेज लोगों के पास नही है और आप एतराज कर रहे हैं कि फलां तमाम ज़िन्दगी अय्याशी करने के बाद अब अल्लाह की तरफ आने का ढोंग कर रहे हैं,
स्वंय से एक सवाल करिये अपने ऐसे कितने काम ये जानते हुए किये हैं कि ये गुनाह है ? उसके बाद अपने क्या किया ? क्या तुम अल्लाह की तरफ रुजू नही किये ? क्या तुम अल्लाह से मुआफी नही मांग कर उसी गुनाह में मुब्तिला रहना बेहतर समझा ? अगर नही तो फिर ये दोहरा मापदंड क्यों ? क्या तुम अल्लाह से बेहतर जानते हो या फिर लोगों का दिलों का हाल जानने वाले हो ? तुम तो उस लड़की पर टिप्पणी कर रहे जिसकी फ़िल्मय इंडस्ट्री से पहले की ज़िंदगी तुम जानते भी नही हो, अल्लाह का खौफ करो यारों । वस्सलाम
ये लेख सोशल मीडिया एक्टिविस्ट 'इरफ़ान राज़ हादी' द्वारा लिखा गया है।