दिन भर काम करने के बाद अगर कोई आपको कामचोर कह देता होगा तो मिर्ची जरूर लग जाती होगी और कई बार आप खुद का असेसमेंट करने पर पाते होंगे कि आपने ऑफिस में काम कम किया है, तब शायद आप खुद के बारे में निगेटिव सोचने लगते होंगे। जबकि सच तो यह है कि आप भी वर्कहॉलिक हैं, वो बात अलग है कि आपको इस बात का अहसास नहीं है।
दिन भर काम करने के बाद अगर कोई आपको कामचोर कह देता होगा तो मिर्ची जरूर लग जाती होगी। कई बार आप खुद का असेसमेंट करने पर पाते होंगे कि आपने ऑफिस में काम कम किया है, तब शायद आप खुद के बारे में निगेटिव सोचने लगते होंगे। जबकि सच तो यह है कि आप भी वर्कहॉलिक हैं, वो बात अलग है कि आपको इस बात का अहसास नहीं है।
9 से 5 की नौकरी अब इतिहास बन चुकी है। घर में भी ऑफिस के काम को लेकर सोचते रहना, दिनभर अपने ईमेल और मैसेज चेक करते रहना भी असल में आपकी नौकरी का एक हिस्सा है, जो आप ड्यूटी आवर्स के बाद भी करते रहते हैं। अगर आप वाकई में इन चीजों में दिन भर इन्वॉल्व रहते हैं तो आप भी वर्कहॉलिक हैं।
आज के समय में आप सिर्फ ऑफिस ही नहीं, बल्कि घर में भी अपने ऑफिस से जुड़े होते हैं। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा किए गए एक सर्वे में आए रिपोर्ट के मुताबिक 76 प्रतिशत लोग अपने स्मार्टफोन के जरीए हमेशा अपने काम से जुड़े होते हैं। यह सर्वेक्षण ऑस्ट्रेलिया में हुआ लेकिन भारत में भी कमोबेश ऐसा ही हाल है। आपको बता दें, वर्कहॉलिक के मामले में भारत विश्व में आठवें नंबर पर आता है। जबकि जापान में सबसे ज्यादा वर्कहॉलिक लोग रहते हैं। यहां आपको वर्कहॉलिक से जुड़ी कुछ जानकारी और कुछ रिपोर्ट बताने जा रहे हैं। तो फिर, बढ़ाइए स्लाइडर और देखिए वर्कहॉलिक से जुड़ी जानकारी।
47 % लोग स्ट्रेस के शिकार ऑस्ट्रेलियन मनोविज्ञान सोसाइटी के एक रिपोर्ट के मुताबिक ,ऑस्ट्रेलिया के ऑफिस में काम करने वाले 47 प्रतिशत लोग स्ट्रेस का शिकार हैं।
वहीं, फ्रांस में एक कानून बनाया गया है ,जिसके तहत कोई भी इंप्लॉयर अपने कर्मचारी को शाम के 6 बजे के बाद काम करने के लिए या ईमेल चेक करने के लिए नहीं दवाब नहीं डाल सकता ।