यह शायरी अधूरी ख्वाहिशों और जीवन की निराशाओं को व्यक्त करती है। जब हम किसी से कुछ उम्मीद रखते हैं और वह पूरी नहीं होती, तो दिल को एक अजीब सी कशमकश और उदासी मिलती है। ख्वाबों में जीना और हकीकत में धोखा खाना, यही इस शायरी का सार है।