यह देशभक्ति शायरी देश के प्रति प्रेम और विश्वासघात के गहरे दर्द को व्यक्त करती है। कवि उन अपनों की बेवफ़ाई पर सवाल उठा रहा है जिन्होंने देश को ही नुकसान पहुँचाया है। यह कविता उन लोगों को समर्पित है जो देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, पर उन्हीं के बीच छिपे गद्दार उन्हें आहत करते हैं। यह उन घावों की पीड़ा है जो अपनों से मिलते हैं, और देश की रक्षा की भावना को ठेस पहुँचाते हैं।