यह क़ता ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण को व्यक्त करता है। कवि जीवन की अनिश्चितताओं और भटकाव के बीच ईश्वर को ही अपना सहारा और लक्ष्य मानता है। वह ईश्वर की कृपा और साथ की कामना करता है।