यह शायरी अकेलेपन की गहराई और उसके अहसास को व्यक्त करती है। इसमें कवि ने बताया है कि कैसे भीड़ में भी इंसान अकेला महसूस कर सकता है। यह अहसास एक अनजानी प्यास की तरह है जो कभी बुझती नहीं।