इस शायरी में कवि ने अनकही मोहब्बत के एहसास को बयां किया है। जब दो दिल मिलते हैं, तो अक्सर ज़ुबान ख़ामोश रह जाती है, लेकिन आँखें सब कुछ कह देती हैं। यह शायरी प्यार के उस एहसास को दर्शाती है जहाँ बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह दिया जाता है, और यह खामोशी ही एक मीठी सी तकलीफ़ या रुसवाई बन जाती है। 'अदा' शब्द यहाँ 'तरीके' या 'अंदाज' के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।

यह शायरी इश्क़ के नशे और उसकी गहराई को व्यक्त करती है। कवि बताता है कि प्रिय की यादों में वह इस कदर खोया है कि हर साँस में उसकी महक महसूस होती है, जो एक मीठा असर पैदा करती है। यह इश्क़ का नशा ऐसा है जो कभी उतरता नहीं। प्रिय के बिना हर पल सूना और वीरान लगता है। 'वीराना' का अर्थ 'सूना' या 'जहाँ कोई न हो' है।