उदासी का अंधेरा: दुख और निराशा का घनापन। बेगाना सा हो जाता है: पराया या अंजान लगने लगता है। शोर उठता है: अंदरूनी बेचैनी या पीड़ा की आवाज़। अनजाना सा: जिसे कोई न जानता हो, छिपा हुआ।
पीड़ा का पथ: जीवन का वह रास्ता जहाँ दुख और कष्ट हों। अंधेरी सी लगती है: भविष्य अंधकारमय और निराशाजनक लगता है। सहारा न दिखता: मदद या साथ देने वाला कोई नहीं दिखता। तन्हाई ही घेरी सी लगती है: अकेलापन ही चारों ओर से घेर लेता है।
नमी अब ठहर गई है: आँसू सूख गए हैं, पर दुख अंदर ही जमा है। आस गुज़र गई है: उम्मीदें खत्म हो गई हैं। झूठी सी मुस्कान: दिखावटी हँसी, अंदर से खुश न होना। साँस बिखर गई है: हिम्मत टूट गई है, जीवन में बिखराव महसूस होना।