मोहब्बत का नग़मा

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: जहाँ, गुमाँ  |  Radeef: है
लबों पे तेरे हँसी का जहाँ है मेरी दुआओं का तू ही समां है ये कैसी कशिश है तेरी निगाहों में खो गया हूँ मैं, ये कैसा गुमाँ है तेरे अश्कों में डूबा हुआ हूँ मैं तेरी हँसी में मेरा आसमां है फुरकान कहता है, ये इश्क़ ही तो है जिसमें हर लम्हा इक दास्तां है

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: नज़र, असर  |  Radeef: है
तेरी सूरत है, मेरी नज़र है तेरे इश्क़ का मुझपे असर है हर पल तेरी यादों में जीता हूँ ये कैसा तेरा मंज़र है क़दम क़दम पे तेरे निशां हैं तेरी बातों में कैसी ख़बर है फुरकान की यही आरज़ू है तेरी मोहब्बत ही मेरा घर है