सपनों की उड़ान

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: सँवारो, उभारो, पुकारो, निखारो, गुज़ारो, उतारो  |  Radeef: चलो
कुछ नया करने का अब, मन में इरादा चलो। सपनों को अपने फिर से, आज सँवारो चलो। जो गिर गए हो तुम कभी, खुद को उभारो चलो। मंज़िल तुम्हें ही है पुकारती, आगे बढ़ो चलो। हर मुश्किल को राह से, अब तुम हटाओ चलो। अपनी हर खूबी को जग में, तुम निखारो चलो। वक़्त ये अनमोल है, यूँ न गुज़ारो चलो। जीत की धुन पर अब तो, खुद को सवारो चलो। रात की काली घटा को, अब तुम उतारो चलो। सुबह का सूरज बनकर, जग को दिखाओ चलो।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: सजाओ, बनाओ, जगाओ, पाओ, मिटाओ, दिखाओ  |  Radeef: जाओ
हार से मत डरो, फिर से उम्मीद सजाओ जाओ। अपनी हिम्मत से तुम, नया इतिहास बनाओ जाओ। सोए हुए अरमानों को, फिर से जगाओ जाओ। अपनी मंज़िल को पाने का, रास्ता बनाओ जाओ। जो तुम्हें रोके, उन बेड़ियों को मिटाओ जाओ। अपनी शक्ति का परिचय, दुनिया को दिखाओ जाओ। हर चुनौती को अवसर में, तुम बदलो जाओ। अपनी मेहनत से हर सपना, सच कर दिखाओ जाओ। ये जीवन एक जंग है, इसे जीत कर जाओ। अपनी पहचान खुद ही, तुम बनाओ जाओ।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: जगाओ, बढ़ाओ, हटाओ, लाओ, जाओ, बनाओ, सजाओ, जगाओ, जाओ, जलाओ  |  Radeef: आओ
अंधेरी रात है पर, खुद को जगाओ आओ। अपनी मंज़िल की तरफ, कदम बढ़ाओ आओ। जो रोके राह में, उन सब को हटाओ आओ। नया सवेरा अपनी, मेहनत से लाओ आओ। डर के साए से बाहर, तुम निकल जाओ आओ। अपनी किस्मत को खुद ही, तुम बनाओ आओ। टूटे हुए सपनों को, फिर से सजाओ आओ। जीवन में नई उमंग, तुम जगाओ आओ। हर मुश्किल से सीख कर, आगे बढ़ते जाओ। खुद पर विश्वास की, मशाल जलाओ आओ।