उदासी का साया

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: जहाँ, गुमाँ, धुआँ  |  Radeef: है
हर लम्हा एक उदासी का साया मुझपे छाया है ज़िंदगी एक वीरान सी लगती है, सूना जहाँ है। जो कभी थे अपने, वो अब पराये लगते हैं, दिल में बस इक अजब सा तन्हाई का गुमाँ है। यादों के धुएँ में खोया रहता हूँ अक्सर, हर खुशी जैसे बुझ चुकी, बेबस धुआँ है। चेहरे पे हँसी का मुखौटा है बस, अंदर, आँखों में नमी और दिल में गम का निशाँ है।