ज़िंदगी का सफ़र
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: सफ़र, खबर, गुज़र, असर, नज़र, डगर, डर, हुनर | Radeef: है
हर साँस एक नया ही यहाँ सफ़र है,
क्या खोया क्या पाया, किसे ये खबर है।
कभी धूप कभी छाँव, ये कैसा गुज़र है,
हर मोड़ पर इक नया ही यहाँ असर है।
खुली आँखों से देखो तो क्या ये नज़र है,
हर पल बदलती हुई एक नई डगर है।
न मंजिल की फिक्र, न राहों का डर है,
बस चलते चलो, यही ज़िंदगी का हुनर है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: राज़, आवाज़, साज़, अंदाज़, बाज, ताज, आज, आगाज़ | Radeef: है
ये ज़िंदगी इक गहरा अनमोल राज़ है,
कभी खामोश, कभी इसमें गूँजती आवाज़ है।
हर धड़कन में कोई नया ही साज़ है,
बदलते रहते इसके हर दिन अंदाज़ है।
जो गिर के उठ खड़ा हो, वही तो बाज है,
संघर्षों से ही मिलता जीवन का ताज है।
न खोना कभी हिम्मत, यही तो आज है,
हर मुश्किल के पीछे कोई नया आगाज़ है।