ज़िंदगी का सफ़र

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: रहा, बहा, कहा  |  Radeef: जा
ज़िंदगी इक सफ़र है, मंज़िल कहाँ हर पल कुछ नया, यही है दास्ताँ कभी हँसी, कभी ग़म, सब चलता रहा इक नदी सी बहती, ये जहाँ कुछ कहा, कुछ अनकहा, वक़्त के साथ गुज़र जा

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: छाया, पाया, समाया  |  Radeef: जा
कभी धूप, कभी छाँव, ज़िंदगी है ये, जो मिला, वो पराया, जो खोया, वो साया हर लम्हा एक सबक, दिल में समाया इस जीवन की धारा में, बहते चला जा जो भी मिले, उसे अपना बनाता जा