अश्कों का सैलाब

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहरा, ठहरा, पहरा, बहता  |  Radeef: है
गम का साया दिल पर गहरा है, हर खुशी का पल जैसे ठहरा है. सूनी राहों पर बस यादों का पहरा है, अश्कों का दरिया आँखों से बहता है.

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: रौनक, दिखती, कटती, हटती  |  Radeef: नहीं
दिल की बस्ती में अब रौनक नहीं, कोई उम्मीद की किरण दिखती नहीं. यादों के साए में रात कटती नहीं, क्यों ये उदासी मुझसे हटती नहीं.

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: पाया, छुपाया, गहराया, मुस्कुराया  |  Radeef: था
भीड़ में भी खुद को तन्हा पाया था, हर मुस्कान के पीछे दर्द छुपाया था. खामोशी का शोर दिल में गहराया था, किसने कहा मेरा दिल मुस्कुराया था?