गम का फ़साना

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: निहाँ, ज़ुबाँ, इम्तिहाँ  |  Radeef: है
दिल में मेरे अब भी वही दर्द-ए-निहाँ है, ज़िंदगी क्यों इतनी बे-ज़ुबाँ है। आँखों से बहते आँसुओं का क्या कहें, हर रात मेरी एक नई इम्तिहाँ है।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: ताज़ा, राज़, अंदाज़  |  Radeef: है
जो दर्द मिला है, वो अब तक ताज़ा है, दिल में छुपा हुआ एक गहरा राज़ है। कहने को तो बहुत कुछ है ज़ुबाँ पर, पर ख़ामोशी में भी एक अलग अंदाज़ है।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: टूट, छूट, रूठ  |  Radeef: गए हैं
ख्वाब मेरे सब टूट गए हैं, रास्ते अब सब छूट गए हैं। किससे कहें हम दिल की बातें, जब अपने भी सब रूठ गए हैं।