Key Highlights

  • भारतीय सेना से 20,000 सिख और मुस्लिम सैनिकों के इस्तीफे का दावा पूरी तरह फर्जी निकला।
  • सरकार ने इस भ्रामक खबर का खंडन किया, इसे सोशल मीडिया पर फैलाया गया 'झूठ' बताया।
  • सोशल मीडिया पर प्रसारित एक डीपफेक वीडियो और कुछ पोस्ट इस गलत दावे का मुख्य स्रोत थे।

भारतीय सेना में सामूहिक इस्तीफे का फर्जी दावा खारिज

भारतीय सेना से कथित तौर पर 20,000 सिख और मुस्लिम सैनिकों के सामूहिक इस्तीफे का दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। यह खबर पूरी तरह भ्रामक और फर्जी पाई गई है। आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी इस्तीफे की कोई सच्चाई नहीं है, और यह दुष्प्रचार समाज में विभाजन पैदा करने के इरादे से फैलाया जा रहा है।

यह दावा मुख्य रूप से एक डीपफेक वीडियो के माध्यम से फैलाया गया, जिसमें भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी, जनरल एम.वी. सुचिंद्र कुमार (जिन्हें कुछ रिपोर्टों में जनरल उपेंद्र द्विवेदी के रूप में भी गलत पहचाना गया) की छवि का उपयोग कर गलत बयान गढ़े गए थे। इस वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, जिससे यह गलत सूचना बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंची।

डीपफेक वीडियो और दुष्प्रचार का सच

सोशल मीडिया पर इस तरह के संवेदनशील और विभाजनकारी दावे का प्रसार गंभीर चिंता का विषय बन गया था। यह सिर्फ एक फर्जी खबर नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और एकता को कमजोर करने का एक प्रयास प्रतीत होता है। भारतीय सेना अपने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सभी समुदायों के सैनिकों के बीच भाईचारे के लिए जानी जाती है। सेना में धर्म, जाति या पंथ के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता। सेना की यह अंतर्निहित शक्ति ही उसे अद्वितीय बनाती है।

न्यूज ऑन एयर द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस दावे का स्पष्ट खंडन किया गया है। सरकार ने इस तरह के भ्रामक प्रचार से लोगों को सावधान रहने की अपील की है। विशेषकर ऐसे समय में जब डिजिटल माध्यमों पर डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग बढ़ रहा है, तथ्य-जाँच (फैक्ट-चेक) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

💡 Did You Know? भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेनाओं में से एक है, जिसमें विभिन्न धर्मों, जातियों और क्षेत्रों के सैनिक पूरी निष्ठा और एकता के साथ देश की सेवा करते हैं।

गलत सूचना के खिलाफ सरकार की चेतावनी

सरकार ने इस तरह के झूठे दावों को 'घृणित और दुर्भावनापूर्ण' बताया है। उसने जनता से ऐसे वीडियो या पोस्ट पर विश्वास न करने का आग्रह किया है जो भारतीय सशस्त्र बलों की अखंडता या धर्मनिरपेक्ष लोकाचार पर सवाल उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं के खिलाफ सतर्कता बरतने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सेना हमेशा देश की सेवा में दृढ़ और अविभाजित रही है। इस प्रकार के दावे सेना के मनोबल को तोड़ने की नाकाम कोशिशें हैं। सैन्य अधिकारियों ने भी इन दावों को मनगढ़ंत बताया है, यह स्पष्ट करते हुए कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

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