Key Highlights

  • नेपाल बाढ़ को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी AI वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
  • पुराने और असंबंधित वीडियो को भी नेपाल की मौजूदा आपदा से जोड़कर साझा किया जा रहा है।
  • भ्रामक सामग्री पर ध्यान न देने और केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह।

नेपाल में आई बाढ़ की विनाशकारी तस्वीरों के नाम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन दिनों कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार किए गए फर्जी वीडियो और पुराने क्लिप तेजी से साझा किए जा रहे हैं। ये भ्रामक दृश्य दर्शकों को गुमराह कर रहे हैं। इससे स्थिति की गंभीरता और गलत सूचना का प्रसार दोनों बढ़ रहा है।

वायरल AI वीडियो: एक खतरनाक हकीकत

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो में भयावह बाढ़ के दृश्यों को दर्शाया गया है। विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि ये क्लिप वास्तव में AI द्वारा बनाए गए हैं। इनमें पानी के बहाव, इमारतों के ढहने और बचाव अभियानों को बेहद वास्तविक तरीके से दर्शाया गया है, लेकिन वे किसी वास्तविक घटना पर आधारित नहीं हैं। ऐसे वीडियो भ्रम पैदा करते हैं, जबकि वास्तविक त्रासदी से जूझ रहे लोगों का दर्द कहीं खो जाता है।

पुराने फुटेज का गलत इस्तेमाल

AI-जनरेटेड सामग्री के अलावा, पुराने और असंबंधित वीडियो भी नेपाल की मौजूदा बाढ़ के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। अमर उजाला जैसे विश्वसनीय मीडिया आउटलेट्स ने ऐसे ही एक मामले का पर्दाफाश किया है। इसमें प्रयागराज में पांच महीने पहले आई बाढ़ के दृश्यों को अब नेपाल से जोड़कर फैलाया जा रहा है। ऐसे में संदर्भ पूरी तरह बदल जाता है, जिससे लोग वर्तमान स्थिति के बारे में गलत जानकारी प्राप्त करते हैं।

💡 Did You Know? दुनिया भर में डीपफेक और AI-जनरेटेड मीडिया का उपयोग कर गलत सूचना फैलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे तथ्यों की जांच करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

भ्रामक प्रचार से बचाव: सतर्कता ही उपाय

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री का अनियंत्रित प्रसार वास्तविक त्रासदी से ध्यान भटकाता है। यह लोगों में अनावश्यक भय या गलतफहमी पैदा करता है। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी वीडियो या खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर भरोसा करना ही समझदारी है। इन भ्रामक दावों से बचने और सटीक जानकारी के लिए, Vews.in पर बने रहें।