Key Highlights
- दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक निगरानी का निर्देश दिया है।
- वांगचुक लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर अनशन पर हैं।
- केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि उन्हें नियमित चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने लद्दाख में भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उनके दैनिक चिकित्सा परीक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस फैसले ने लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरणीय सुरक्षा की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन को एक नई न्यायिक दिशा दी है।
कोर्ट की चिंता और केंद्र का रुख
जस्टिस तुषार राव गेडेला की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन को आदेश दिया कि वांगचुक की दैनिक स्वास्थ्य स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जाए। कोर्ट का यह निर्देश तब आया, जब वांगचुक ने अपनी जान के संभावित जोखिम को लेकर अदालत का रुख किया। वांगचुक ने आशंका व्यक्त की थी कि उन्हें भूख हड़ताल स्थल से जबरन हटाया जा सकता है, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सहायक सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि वांगचुक को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन ने उन्हें कभी भी जबरन अस्पताल में भर्ती करने का प्रयास नहीं किया। एएसजी शर्मा ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है और इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है।
लद्दाख की मांगें और वांगचुक का अनशन
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से लद्दाख के तापमान शून्य से नीचे पहुँचने के बावजूद 'जलवायु उपवास' पर हैं। उनकी प्रमुख मांगों में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना और पूर्ण राज्य का दर्जा देना शामिल है। उनका तर्क है कि यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है और इसे कॉर्पोरेट शोषण से बचाने के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा की आवश्यकता है। उनके इस अनशन ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
यह मामला भारत के संघीय ढांचे के भीतर क्षेत्रीय आकांक्षाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने की चुनौती को उजागर करता है। वांगचुक का यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि पारिस्थितिक न्याय की भी मांग है। हाई कोर्ट का यह आदेश उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आगे क्या?
इस मामले में अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होनी है। तब तक केंद्र सरकार और लद्दाख प्रशासन को वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यायिक हस्तक्षेप के बाद इस गतिरोध का क्या समाधान निकलता है। उनकी मांगों पर सरकार का अगला कदम क्या होगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
ताजा अपडेट्स के लिए Vews.in पर बने रहें।