Key Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों से 'मिलकर निर्माण' का आह्वान किया।
  • वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने व्यापार और डिजिटल सहयोग पर जोर दिया।
  • यह संदेश वैश्विक चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान पर केंद्रित रहा।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत ने 'मिलकर निर्माण' (Build Together) के सशक्त संदेश के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने संबोधनों में वैश्विक एकजुटता और साझा विकास पर बल दिया। यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत ने सहयोग के नए आयाम खोलने की बात कही।

प्रधानमंत्री मोदी का बहुपक्षीय सहयोग पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में बहुपक्षीय प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स देशों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। मोदी ने विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने समावेशी विकास, सतत ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ब्रिक्स फ्रेमवर्क के तहत ठोस कार्रवाई का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक और नवाचार साझा भविष्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ाने पर जोर दिया।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आर्थिक साझेदारी को सराहा

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। गोयल ने डिजिटल परिवर्तन और नवोन्मेषी समाधानों की क्षमता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भारत अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को ब्रिक्स भागीदारों के साथ साझा करने को इच्छुक है। इसका उद्देश्य सभी के लिए आर्थिक विकास और समृद्धि सुनिश्चित करना है। गोयल ने व्यापारिक बाधाओं को कम करने और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने की अपील की।

'मिलकर निर्माण' का व्यापक अर्थ

भारत का 'मिलकर निर्माण' का संदेश केवल आर्थिक या राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है। यह संस्कृति, शिक्षा और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को भी बढ़ावा देने का आह्वान है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित करना है जो वैश्विक चुनौतियों के स्थायी और समावेशी समाधान प्रदान कर सके। यह एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। शिखर सम्मेलन में कई देशों ने भारत की इस पहल का स्वागत किया।

ब्रिक्स समूह में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। देश लगातार एक ऐसे विश्व व्यवस्था की वकालत कर रहा है जो न्यायपूर्ण, समान और समावेशी हो। यह संदेश उसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में ब्रिक्स देश इन विचारों को ठोस कार्य योजनाओं में बदलेंगे।

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