Key Highlights

  • राहुल गांधी ने दिल्ली में छात्रों से मुलाकात के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की मांग की।
  • यह मांग NEET UG 2024 और UGC-NET परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद उठी है।
  • गांधी ने जोर देकर कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।

दिल्ली में छात्रों के एक समूह से घिरे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत उनके पद से हटाने का आग्रह किया। यह आह्वान राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) UG 2024 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) से जुड़े व्यापक विवादों और कथित पेपर लीक के आरोपों के बीच आया है। देश भर में छात्र इन परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

गांधी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि पेपर लीक एक "राष्ट्र विरोधी गतिविधि" है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "शिक्षा मंत्री को इन सभी अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। प्रधानमंत्री को धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए।" उन्होंने छात्रों की चिंताओं को ध्यान से सुना, जिन्होंने अपनी आपबीती साझा की और परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी पर गहरी निराशा व्यक्त की।

राष्ट्रीय परीक्षा विवाद: गहराता संकट

NEET UG 2024 परिणाम घोषित होने के बाद से ही विवादों में घिरा रहा है। ग्रेस मार्क्स, पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, और छात्रों के साथ-साथ विपक्षी दल भी लगातार दोबारा परीक्षा और सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। इस बीच, UGC-NET परीक्षा को भी कथित पेपर लीक के बाद रद्द कर दिया गया, जिससे शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग गया।

विपक्षी हमले और सरकार पर दबाव

शिक्षा क्षेत्र में लगातार सामने आ रही इन समस्याओं ने केंद्र सरकार पर भारी दबाव बना दिया है। विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रहे हैं। राहुल गांधी का बयान इन हमलों को और तेज करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने शिक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया है, जिससे मेधावी छात्रों को अन्याय का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार को इस गंभीर स्थिति के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और तत्काल सुधारात्मक उपाय करने चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके। पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब एक राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुकी है।

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