Key Highlights
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द की।
- कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को 'असंगत' और 'बेतुका' करार दिया।
- यह मामला नोएडा में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़ा था, जिसमें आकृति पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने का आरोप था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। यह फैसला राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत दलीलों और सबूतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। न्यायमूर्ति विवेक वर्मा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य की कार्यवाही को 'असंगत' और 'बेतुका' बताते हुए आकृति चौधरी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
राज्य की दलीलें और कोर्ट का अवलोकन
राज्य सरकार ने आकृति चौधरी पर सार्वजनिक व्यवस्था को भंग करने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए रासुका के तहत हिरासत में लिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। खंडपीठ ने पाया कि राज्य के पास रासुका जैसे सख्त कानून को लागू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि दस्तावेजों में कई विसंगतियां थीं, जो राज्य के मामले को कमजोर करती थीं।
नोएडा मजदूर प्रदर्शन और आकृति चौधरी की गिरफ्तारी
यह मामला नोएडा के सेक्टर 10 स्थित एक फैक्ट्री के बाहर हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़ा है। जनवरी 2023 में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा और तोड़फोड़ हुई थी। प्रशासन ने आकृति चौधरी को इस घटना में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें रासुका के तहत हिरासत में ले लिया गया। आकृति चौधरी ने इस हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
न्यायिक समीक्षा का महत्व
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय रासुका जैसे कानूनों के दुरुपयोग पर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह फैसला नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और राज्य की शक्तियों की न्यायिक समीक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए ठोस और वैध आधार होने चाहिए, न कि सिर्फ आरोपों पर आधारित कार्रवाई।
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