Key Highlights

  • प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस दौरान कोई अलग द्विपक्षीय मुलाकात निर्धारित नहीं है।
  • भारत और रूस के नेताओं के बीच 15 दिनों के भीतर यह दूसरी महत्वपूर्ण बैठक होगी।

SCO शिखर सम्मेलन: मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता तय, जिनपिंग से अलग मुलाकात नहीं

आगामी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह बैठक दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर केंद्रित होगी। राजनयिक हलकों में इस बात पर भी गौर किया गया है कि इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री मोदी की कोई अलग द्विपक्षीय मुलाकात तय नहीं की गई है।

भारत-रूस संबंधों को नई दिशा

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। 15 दिनों के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात होगी, जो भारत और रूस के गहरे और निरंतर संवाद को दर्शाती है। उम्मीद है कि इस वार्ता में वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग जैसे कई विषयों पर चर्चा होगी। भारत रूस से कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख खरीदार रहा है, ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

चीन के साथ संबंधों में मौजूदा स्थिति

शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच किसी अलग द्विपक्षीय बैठक का अभाव ध्यान खींच रहा है। सीमा विवादों और हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह फैसला भारत की विदेश नीति में एक निश्चित रुख को दर्शाता है। हालांकि, बहुपक्षीय मंचों पर दोनों नेता एक साथ मौजूद रहेंगे, लेकिन अलग से आमने-सामने की बातचीत की अनुपस्थिति मौजूदा तनावों की पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। भारत ने हमेशा शांतिपूर्ण समाधान और सीमा पर यथास्थिति बहाल करने पर जोर दिया है।

SCO का महत्व और भारत की भूमिका

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है जो सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है। भारत इस संगठन का एक सक्रिय सदस्य है और क्षेत्रीय स्थिरता तथा समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता रहा है। आगामी शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें आतंकवाद का मुकाबला और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी प्रमुख रहेंगे। भारत वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए SCO जैसे मंचों का प्रभावी ढंग से उपयोग करता रहा है।

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