Key Highlights

  • सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के नाम से वायरल वीडियो एडिटेड है।
  • यह क्लिप करीब एक दशक पुराने एक सार्वजनिक भाषण का हिस्सा है।
  • मूल वीडियो में पीएम मोदी ने इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं की थी।

वायरल वीडियो के पीछे की पूरी सच्चाई

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक छोटा वीडियो क्लिप तेजी से साझा किया जा रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी 'ऊंची जातियों' के खिलाफ टिप्पणी कर रहे हैं। हालांकि, हमारी पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से फर्जी साबित हुआ है।

पुराने भाषण को मिला नया रंग

जांच में पता चला है कि वायरल हो रहा वीडियो असल में करीब 10 साल पुराना है। उस समय के पूर्ण भाषण को सुनने पर स्पष्ट होता है कि पीएम मोदी ने वहां ऐसी कोई बात नहीं कही थी जो किसी विशेष वर्ग के खिलाफ हो। शरारती तत्वों ने वीडियो के एक हिस्से को काटकर उसे भ्रामक संदर्भ के साथ जोड़ दिया है।

💡 Did You Know? किसी भी वायरल वीडियो की सत्यता जांचने के लिए हमेशा उसके मूल (ओरिजिनल) स्रोत और पूरे संदर्भ को देखना अनिवार्य है, क्योंकि एआई और एडिटिंग टूल्स के दौर में वीडियो को मैनिपुलेट करना आसान हो गया है।

गलत सूचनाओं से कैसे बचें

इंटरनेट पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है। अक्सर पुराने वीडियो को एडिट करके उसे वर्तमान का बताकर पेश किया जाता है। तथ्यों की अनदेखी करना सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

डिजिटल युग में सावधानी ही बचाव है। ऐसी भ्रामक सूचनाओं से दूर रहें और आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। सटीक और निष्पक्ष खबरों के लिए आप Vews.in पर नियमित रूप से अपडेट प्राप्त कर सकते हैं।