मुख्य बिंदु

  • कोलकाता में आनंदबाजार पत्रिका (एबीपी) के दफ्तर की बाहरी दीवारों पर भगवा रंग पोता गया।
  • यह घटना कथित तौर पर 'भगवा गुंडागर्दी' नामक एक खबर के प्रकाशन के विरोध में हुई।
  • पुलिस की मौजूदगी में इस घटना के घटित होने से मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।

आनंदबाजार पत्रिका कार्यालय पर भगवा रंग: 'भगवा गुंडागर्दी' खबर पर बढ़ा विवाद

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में प्रतिष्ठित मीडिया समूह आनंदबाजार पत्रिका (एबीपी) के दफ्तर की दीवारों को भगवा रंग से रंग दिया गया। यह घटना उस वक्त हुई जब पुलिस मौके पर मौजूद थी। इस कृत्य को कथित तौर पर एबीपी समूह द्वारा प्रकाशित एक खबर, जिसमें 'भगवा गुंडागर्दी' शब्द का इस्तेमाल किया गया था, के विरोध के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस की उपस्थिति में दीवारों पर भगवा लेप

सूत्रों के अनुसार, यह घटना गुरुवार की रात को हुई। प्रदर्शनकारियों ने, जिनकी पहचान अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, एबीपी समूह के दफ्तर की बाहरी दीवारों पर भगवा रंग पोत दिया। घटना के समय पुलिस कर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यह कृत्य मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहस को फिर से हवा देता है।

💡 क्या आप जानते हैं? आनंदबाजार पत्रिका (ABP) भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित बांग्ला दैनिक समाचार पत्रों में से एक है, जिसकी स्थापना 1922 में हुई थी।

'भगवा गुंडागर्दी' शीर्षक पर गरमाई सियासत

यह विवाद एबीपी द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से शुरू हुआ, जिसमें किसी घटना का वर्णन करते हुए 'भगवा गुंडागर्दी' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। इस शब्द के प्रयोग ने कुछ समूहों को नाराज कर दिया, जिन्होंने इसे सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया। विरोध स्वरूप, एबीपी कार्यालय पर भगवा रंग पोतना और कथित तौर पर इससे जुड़े नारे लगाना, इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना देता है।

विपक्षी दलों ने इस घटना की निंदा की है, वहीं सत्ताधारी दल ने इसे मीडिया के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई बताया है। हालांकि, किसी भी संगठन ने अभी तक इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

यह घटना मीडिया पर बढ़ते दबाव और राजनीतिक हस्तियों द्वारा अक्सर मीडिया को नियंत्रित करने के प्रयासों की ओर इशारा करती है। इस तरह के कृत्य न केवल भय का माहौल बनाते हैं बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए भी एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

इस घटना पर देश भर की मीडिया संस्थाओं और नागरिक समाज संगठनों की पैनी नजर है। वे इस तरह की कार्रवाइयों की निंदा कर रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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