Key Highlights
- सत्य निकेतन में निर्धारित ढाई मंजिल की अनुमति के बावजूद कई इमारतों को पांच मंजिला तक खड़ा कर दिया गया है।
- अधिकांश PG संचालकों के पास अग्निशमन विभाग की अनिवार्य NOC तक उपलब्ध नहीं है।
- नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है, जिससे अवैध निर्माण का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
अवैध निर्माण और खतरों का जाल
दिल्ली का सत्य निकेतन इलाका, जो छात्रों का प्रमुख ठिकाना माना जाता है, आज एक बड़ी त्रासदी के मुहाने पर खड़ा है। यहाँ नियम कायदों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई पांच मंजिला इमारतें किसी बड़े खतरे का संकेत दे रही हैं। सरकारी रिकॉर्ड में जहां केवल ढाई मंजिल के निर्माण की अनुमति है, वहां जमीन की लालच में पांच-पांच मंजिलें तान दी गई हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सवालों के घेरे में सीधा एमसीडी (MCD) और स्थानीय प्रशासन है। इलाके में हो रहे अवैध निर्माणों की जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा बरती गई चुप्पी ने कई जिंदगियों को दांव पर लगा दिया है। जब भी कोई बड़ा हादसा होता है, तब ही प्रशासन कागजों पर कार्रवाई का नाटक करता है। इसके बाद सब कुछ फिर से सामान्य हो जाता है, जिससे अवैध निर्माण माफियाओं के हौसले बुलंद रहते हैं।
छात्रों की सुरक्षा का क्या?
किराए के नाम पर छात्रों से भारी रकम वसूलने वाले इन PG मालिकों के लिए सुरक्षा मानक केवल कागजी खानापूर्ति है। न तो वहां आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही आपातकालीन निकास के लिए उचित रास्ता। ऐसी तंग गलियों में बनी ऊंची इमारतें किसी भी प्राकृतिक आपदा या आग की स्थिति में एक मौत का जाल साबित हो सकती हैं। क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी घट जाएगी?
इलाके में बढ़ती भीड़ और निर्माण की अनियंत्रित गति ने नागरिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा दिया है। समय रहते यदि इन इमारतों की स्ट्रक्चरल ऑडिट नहीं की गई, तो भविष्य में होने वाले नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी। अधिक विस्तृत और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए Vews.in पर बने रहें।