Key Highlights
- नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के छात्रों ने उमर खालिद पर डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग स्थगित की।
- छात्र आयोजकों ने इस निर्णय के पीछे बाहरी दबाव की बात को सिरे से खारिज किया।
- यह स्थगन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया है।
एनएलएसआईयू में उमर खालिद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग स्थगित
बेंगलुरु के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में उमर खालिद से संबंधित एक डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग को छात्रों ने स्थगित कर दिया है। यह कदम परिसर में उपजे विवाद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया, हालांकि आयोजकों ने किसी भी बाहरी दबाव के कारण स्थगन से इनकार किया है।
आयोजकों ने दबाव से किया इनकार, बताई सुरक्षा की चिंता
'द कलेक्टिव' नामक छात्र संगठन, जिसने 'इंडियाज हेट स्टोरीज' शीर्षक वाली डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का आयोजन किया था, ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह फैसला 'सुरक्षा चिंताओं' और 'विश्वविद्यालय परिसर के भीतर अकादमिक माहौल बनाए रखने' के लिए लिया गया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनके निर्णय पर कोई बाहरी दबाव नहीं था। यह डॉक्यूमेंट्री, जिसे 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद पर केंद्रित बताया जा रहा है, को लेकर कुछ समय से कैंपस में तनाव था।
एबीवीपी का कड़ा विरोध और हंगामा
इस स्क्रीनिंग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीव्र आपत्ति जताई थी। एबीवीपी के सदस्यों ने इस कार्यक्रम को 'राष्ट्र-विरोधी' करार देते हुए परिसर में प्रदर्शन किए। उनका तर्क था कि इस तरह की स्क्रीनिंग उन लोगों का महिमामंडन करती है जिन पर गंभीर आरोप हैं और इससे विश्वविद्यालय का माहौल खराब हो सकता है। उनके विरोध प्रदर्शनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भी कुछ दबाव बनाया।
छात्रों का स्टैंड: आंतरिक निर्णय, बाहरी हस्तक्षेप नहीं
एनएलएसआईयू के छात्रों ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया है कि कैंपस में होने वाले किसी भी कार्यक्रम का निर्णय छात्र समुदाय के हित को ध्यान में रखकर लिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि वे भविष्य में डॉक्यूमेंट्री को प्रदर्शित करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं, ताकि सभी के लिए एक सुरक्षित और समावेशी मंच सुनिश्चित हो सके। हालांकि, नई तारीखों या प्रारूप पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर अकादमिक स्वतंत्रता, छात्र सक्रियता और परिसर में बाहरी हस्तक्षेप के मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस पूरे मामले पर अधिक जानकारी के लिए, Vews.in से जुड़े रहें।