Nazm

Poet: Furkan S Khan

Kaafiya: पुकारती, करती, तारती, लाती

Radeef: हैं

उठ, कि अब मंज़िलें पुकारती हैं,
तेरी राहों को रौशन करती हैं।
डगमगाना न कभी, ओ राहगीर,
तेरी हिम्मत ही तुझको तारती हैं।

गर गिरे, तो संभलना सीख ले,
हर ठोकर से उभरना सीख ले।
ये अंधेरे तो बस पल भर के हैं,
हर सुबह एक नया सवेरा लाती हैं।

Nazm

Poet: Furkan S Khan

Kaafiya: कर, देख, पार, हार, पहचान, मान, इंसान, महान

Radeef: तू

कर्म कर, फल की चिंता न कर तू,
आगे बढ़, पीछे मुड़कर न देख तू।
हर रुकावट को कर दे पार तू,
जीत तेरी है, बस हिम्मत न हार तू।

गिर के उठना है तेरी पहचान,
हर चुनौती में छुपा है तेरा मान।
कर यकीन खुद पर, ओ इंसान,
तेरी शक्ति है सबसे महान तू।


मंज़िलें: लक्ष्य, गंतव्य (Goals, destination) राहगीर: यात्री (Traveler) डगमगाना: विचलित होना, अस्थिर होना (To waver, to be unstable) हिम्मत: साहस, हौसला (Courage, morale) तारती: पार लगाती है, बचाती है (Helps cross, saves) ठोकर: बाधा, रुकावट (Obstacle, hindrance) उभरना: ऊपर उठना, ठीक होना (To rise, to recover)

कर्म: कार्य, काम (Action, work) चिंता: फिक्र (Worry) रुकावट: बाधा (Obstacle) हिम्मत: साहस (Courage) पहचान: पहचानना, पहचान (Identity, recognition) चुनौती: मुश्किल, परीक्षा (Challenge, test) मान: सम्मान, गौरव (Respect, pride) यकीन: विश्वास (Belief, trust) महान: बड़ा, उत्कृष्ट (Great, excellent)