मुख्य बातें
- अबू धाबी बंदरगाह पर 11 भारतीय नाविक लगभग एक साल से फंसे हैं।
- वेतन और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव, मानसिक परेशानी बढ़ी।
- भारतीय दूतावास नाविकों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयासरत।
अबू धाबी में 11 माह से फंसे भारतीय नाविक: वतन वापसी को बेताब
अबू धाबी के एक सुनसान बंदरगाह पर एक जहाज़ में, 11 भारतीय नाविक पिछले 11 महीनों से अपनी वतन वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं। समय बीतता जा रहा है, लेकिन उनकी घर लौटने की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। इन नाविकों का संघर्ष अब एक दिल दहला देने वाली कहानी बन चुका है, जहां वे केवल अपने घर की तरफ़ एक राह की तलाश में हैं।
वेतन और भोजन का गंभीर संकट
पिछले कई महीनों से इन नाविकों को वेतन नहीं मिला है। भोजन और पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी उन्हें जूझना पड़ रहा है। जहाज़ का मालिक, जिसके नाम का अभी खुलासा नहीं किया गया है, कथित तौर पर अपनी ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़ चुका है। इस स्थिति ने नाविकों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाला है। उनमें से कई बीमारियों से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ अवसाद के शिकार हो रहे हैं।
राहत की तलाश में अपील
फंसे हुए नाविकों ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से अपनी दुर्दशा बयां की है। उनका कहना है कि वे अपने परिवारों से दूर, एक अनिश्चित भविष्य के साथ संघर्ष कर रहे हैं। हर गुज़रता दिन उनके लिए एक नई चुनौती लेकर आता है।
भारतीय दूतावास का हस्तक्षेप
अबू धाबी में भारतीय दूतावास इस मामले से पूरी तरह अवगत है। दूतावास के अधिकारी स्थानीय अधिकारियों और जहाज़ मालिक से लगातार संपर्क साध रहे हैं। उनका प्रयास है कि नाविकों को उनका बकाया वेतन मिले और उनकी सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित हो सके। हालांकि, प्रक्रिया धीमी और जटिल बनी हुई है, जिससे नाविकों की चिंताएं बढ़ रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन
यह मामला अंतर्राष्ट्रीय समुद्री श्रम सम्मेलन (MLC) जैसे नियमों के स्पष्ट उल्लंघन को दर्शाता है। MLC नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी कार्य परिस्थितियों को नियंत्रित करता है। ऐसे मामले समुद्री उद्योग में श्रमिक शोषण के बड़े मुद्दे को उजागर करते हैं, जहां कई बार जहाज़ मालिक अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं।
भविष्य की अनिश्चितता
इन 11 नाविकों का भविष्य अधर में है। वे बस अपने परिवार के पास लौटना चाहते हैं। इस लम्बे इंतज़ार ने उनकी हिम्मत को तोड़ दिया है। भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद है ताकि इन भारतीयों की घर वापसी सुनिश्चित हो सके।
इस मामले पर अधिक जानकारी के लिए, Vews.in पर बने रहें।