Key Highlights
- भारत ने फलस्तीन मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए ‘द्विराष्ट्र समाधान’ को फिर समर्थन दिया है।
- यह रुख विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) पवन कपूर और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बयानों में मुखर रहा।
- भारत शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देता रहा है।
दिल्ली ने एक बार फिर फलस्तीन मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए अपने दृढ़ संकल्प को रेखांकित किया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में 'द्विराष्ट्र समाधान' के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। यह रुख, क्षेत्रीय स्थिरता और दीर्घकालिक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत का अडिग संकल्प: द्विराष्ट्र समाधान ही एकमात्र मार्ग
भारत सरकार का मानना है कि इजरायल और फलस्तीन के बीच चल रहे दशकों पुराने संघर्ष का एकमात्र व्यवहार्य और टिकाऊ समाधान द्विराष्ट्र सिद्धांत में निहित है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम), पवन कपूर ने हाल ही में अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'भारत बातचीत के जरिए फलस्तीन मुद्दे के द्विराष्ट्र समाधान को अपना समर्थन दोहराता है, जिसके तहत पूर्व-1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी येरुशलम को राजधानी मानते हुए एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राज्य का गठन हो, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहे।'
क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा का महत्व
भारत की यह स्थिति केवल फलस्तीन के अधिकारों का समर्थन नहीं करती, बल्कि मध्य पूर्व में व्यापक शांति और सुरक्षा के लिए भी एक आधारशिला रखती है। भारत लगातार क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत के माध्यम से समस्याओं को हल करने का आह्वान करता रहा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के इस दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत किया है। यह वैश्विक मंचों पर भारत की एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
दीर्घकालिक ऐतिहासिक समर्थन
भारत का फलस्तीन के प्रति समर्थन नया नहीं है। यह ऐतिहासिक और सिद्धांत आधारित रहा है। भारत ने हमेशा फलस्तीनी लोगों की आकांक्षाओं और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है। हालांकि भारत के इजरायल के साथ संबंध भी मजबूत हुए हैं, लेकिन फलस्तीन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता अविचल बनी हुई है। यह संतुलित विदेश नीति भारत की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को दर्शाती है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका
भारत, एक तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में, BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी इन मुद्दों पर अपनी राय रखता रहा है। पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्षों के बीच, भारत ने हमेशा संयम, बातचीत और अंतर्राष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया है। द्विराष्ट्र समाधान के लिए भारत का यह आह्वान एक ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय इस संवेदनशील क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए संघर्ष कर रहा है। यह भारत की दृढ़ विश्वास का प्रमाण है कि केवल कूटनीति ही आगे का रास्ता है।
🗣️ Share Your Opinion!
आपकी राय में, मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए भारत का यह रुख कितना महत्वपूर्ण है? अपनी प्रतिक्रियाएं हमारे साथ साझा करें।
अधिक विस्तृत समाचार कवरेज के लिए, Vews.in पर विजिट करें।