Key Highlights

  • ईरान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बातचीत के दावों को सिरे से खारिज किया।
  • मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट किया कि 'शर्तों के बिना कोई वार्ता नहीं' होगी।
  • तेहरान ने जनता को 'भ्रामक बयानों' से गुमराह न होने की सलाह दी।

तेहरान। ईरान ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है जिनमें ईरान के साथ संभावित बातचीत का संकेत दिया गया था। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना किसी पूर्व शर्त के कोई भी वार्ता संभव नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

ट्रंप के दावों पर ईरान का सीधा जवाब

ईरान के Expediency Discernment Council के सचिव मोहसिन रेजाई ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक कहा, 'शर्तों के बिना कोई बातचीत नहीं।' रेजाई ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए ईरानी जनता से आग्रह किया कि वे ऐसे 'भ्रामक बयानों' से भ्रमित न हों। उनका बयान तेहरान की अपनी विदेश नीति में दृढ़ता और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की इच्छा को दर्शाता है।

ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति अपनाई थी। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (संयुक्त व्यापक कार्य योजना - JCPOA) से अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। इन प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया। ईरान तभी से इन प्रतिबंधों को हटाने की मांग कर रहा है।

ईरान की शर्तों का क्या मतलब?

ईरान का 'शर्तों के बिना कोई बातचीत नहीं' का रुख उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। ईरान लगातार मांग करता रहा है कि अमेरिका पहले उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए। साथ ही, परमाणु समझौते पर लौट आए। ईरान का मानना है कि केवल तभी सार्थक बातचीत का रास्ता खुल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच विश्वास बहाली की कमी स्पष्ट दिख रही है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर गंभीर मतभेद हैं।

💡 Did You Know? ईरान और अमेरिका के बीच राजनयिक संबंध 1980 से ही औपचारिक रूप से टूट गए हैं, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क अक्सर अप्रत्यक्ष माध्यमों से ही होते रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर असर

ईरान का यह बयान क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डाल सकता है। मध्य पूर्व में तनाव हमेशा से चिंता का विषय रहा है। किसी भी बातचीत से इनकार से गतिरोध और गहरा सकता है। वैश्विक शक्तियाँ इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। वे ईरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है। दूसरी ओर, पश्चिमी देश इसे हथियार बनाने की क्षमता के रूप में देखते हैं।

तेहरान ने बार-बार कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों से समझौता नहीं करेगा। भविष्य में किसी भी संभावित वार्ता के लिए ईरान की शर्तें एक महत्वपूर्ण आधार रहेंगी। तब तक दोनों देशों के बीच तनाव जारी रहने की आशंका है।

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