Key Highlights
- इजरायली सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में प्रवेश किया।
- इस दौरे को फिलिस्तीनी और कई अरब देशों ने 'उत्तेजना' करार दिया।
- यह घटना यरुशलम के पवित्र स्थलों पर दशकों से चले आ रहे 'यथास्थिति' समझौते का संभावित उल्लंघन है।
मुख्य घटनाक्रम: बेन-ग्विर का अल-अक्सा परिसर दौरा
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने हाल ही में अल-अक्सा मस्जिद परिसर का दौरा किया। यह कदम तत्काल ही एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद का कारण बन गया। यरुशलम में स्थित यह पवित्र स्थल यहूदियों के लिए टेंपल माउंट और मुसलमानों के लिए हरम अल-शरीफ के नाम से जाना जाता है, दोनों धर्मों के लिए इसका गहरा महत्व है। बेन-ग्विर, जो अपने धुर-दक्षिणपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं, अपने समर्थकों के एक समूह के साथ यहाँ पहुँचे।
इस दौरे को व्यापक रूप से एक उत्तेजक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। अल-अक्सा परिसर सदियों से चली आ रही एक संवेदनशील यथास्थिति द्वारा शासित है, जिसके तहत यहूदियों को स्थल पर जाने की अनुमति है लेकिन उन्हें वहाँ प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है। बेन-ग्विर का यह दौरा इस ऐतिहासिक समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ और निंदा
इस घटना की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की गई है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने इसे एक अभूतपूर्व उकसावे वाला कदम बताया। जॉर्डन, जो यरुशलम के ईसाई और मुस्लिम पवित्र स्थलों का संरक्षक है, ने इस दौरे को एक गंभीर उल्लंघन करार दिया और इसकी कड़ी निंदा की।
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई अरब देशों ने भी इस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इजरायल से 'यथास्थिति' का सम्मान करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस घटना पर अपनी चिंता प्रकट की है, जो इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकती है।
ऐतिहासिक संदर्भ और 'यथास्थिति'
अल-अक्सा परिसर यरुशलम के पुराने शहर में स्थित है और यह दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यह स्थल इस्लाम में तीसरा सबसे पवित्र और यहूदी धर्म में सबसे पवित्र है। ऐतिहासिक रूप से, 'यथास्थिति' समझौते के तहत, मुसलमानों को यहाँ प्रार्थना करने का अधिकार है, जबकि अन्य धर्मों के आगंतुक परिसर में जा सकते हैं, लेकिन उन्हें वहाँ प्रार्थना करने की अनुमति नहीं है।
इजरायली राजनेताओं द्वारा इस तरह के दौरे पहले भी हुए हैं, लेकिन बेन-ग्विर जैसे एक वरिष्ठ और धुर-दक्षिणपंथी मंत्री का यह दौरा विशेष रूप से चिंताजनक है। उनके इस कदम को अक्सर तनाव बढ़ाने और क्षेत्र में हिंसा भड़काने की क्षमता के रूप में देखा जाता है।
बढ़ता तनाव और भविष्य की चिंताएँ
बेन-ग्विर के इस दौरे ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में और इजाफा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे कदम मध्य पूर्व में अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं और शांति प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं। यह घटना भविष्य में और अधिक झड़पों और क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका को जन्म देती है।
अतीत में भी इस पवित्र स्थल पर हुए विवादों ने बड़े पैमाने पर हिंसा को जन्म दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब इजरायल और फिलिस्तीन दोनों से संयम बरतने और 'यथास्थिति' का सम्मान करने का आग्रह कर रहा है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।
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