युद्धग्रस्त खाड़ी से 52,000 भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी: विदेश मंत्रालय

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी देशों से 52,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रूप से उनके वतन वापस लाया गया है। यह आंकड़ा भारत सरकार की अपने प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है, खासकर जब वे संकटग्रस्त क्षेत्रों में हों।

संकट के समय में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

अक्टूबर 2023 में इजरायल और हमास के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता काफी बढ़ गई है। इस अशांत माहौल में, खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता का विषय बन गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि भारत सरकार ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए त्वरित कदम उठाए, जिससे हजारों भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित हो सकी।

  • विदेश मंत्रालय ने खाड़ी क्षेत्र में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को अलर्ट पर रखा।
  • विशेष उड़ानें और अन्य आवश्यक लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की गई।
  • आवश्यक दस्तावेज न होने या अन्य कठिनाइयों का सामना कर रहे नागरिकों को विशेष सहायता प्रदान की गई।
  • यह सुनिश्चित किया गया कि जो लोग वापस लौटना चाहते हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग मिले।

भारत की वैश्विक निकासी क्षमता की मिसाल

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने इतने बड़े पैमाने पर अपने नागरिकों को विदेशों से वापस बुलाया है। 'वंदे भारत मिशन' के तहत कोविड-19 महामारी के दौरान लाखों भारतीयों को घर वापस लाया गया था, और हाल ही में 'ऑपरेशन गंगा' के माध्यम से यूक्रेन से हजारों छात्रों को सुरक्षित निकाला गया था। खाड़ी देशों से 52,000 से अधिक नागरिकों की यह सफल वापसी एक बार फिर भारत की प्रभावशाली वैश्विक निकासी क्षमता और संकट प्रबंधन कौशल को उजागर करती है। यह दिखाता है कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हों।

विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि सरकार खाड़ी देशों में शेष भारतीय प्रवासियों की स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रही है और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति के लिए तैयार है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भारतीय समुदाय सुरक्षित रहे और उन्हें हर संभव सहायता मिलती रहे।