Key Highlights
- युगांडा की सेना ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की प्रतिमा का अनावरण किया।
- योनातन नेतन्याहू 1976 के 'ऑपरेशन एंटेबे' में शहीद हुए एक असाधारण सैन्य नायक थे।
- यह सम्मान उनके बलिदान और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ उनके साहसिक संघर्ष को समर्पित है।
युगांडा में एक नायक का सम्मान: योनातन नेतन्याहू की प्रतिमा का अनावरण
युगांडा की सेना ने हाल ही में इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई, योनातन नेतन्याहू की एक प्रतिमा का अनावरण किया है। यह कदम 1976 में हुए ऐतिहासिक 'ऑपरेशन एंटेबे' की 48वीं बरसी पर उनकी बहादुरी और बलिदान को श्रद्धांजलि देता है। योनातन, जिन्हें 'योनी' के नाम से भी जाना जाता है, इस साहसी बंधक बचाव मिशन में शहीद होने वाले एकमात्र इजरायली कमांडो थे। युगांडा की धरती पर उनका यह सम्मान एक गहरा प्रतीक है। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को भी दर्शाता है।
ऑपरेशन एंटेबे: एक साहसी मिशन की कहानी
ऑपरेशन एंटेबे इतिहास के सबसे साहसी सैन्य अभियानों में से एक के रूप में दर्ज है। 27 जून 1976 को, फिलिस्तीनी और जर्मन आतंकवादियों ने एयर फ्रांस की फ्लाइट 139 को हाईजैक कर लिया था। इसमें 248 यात्री और 12 क्रू सदस्य सवार थे। विमान को युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे पर ले जाया गया था। वहां, आतंकवादियों ने इजरायली और यहूदी यात्रियों को अलग कर बंधक बना लिया। उन्होंने बंधकों की रिहाई के बदले में दुनिया भर की जेलों में बंद 53 आतंकवादियों की रिहाई की मांग की थी। स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी।
इज़रायल सरकार ने अपने नागरिकों को बचाने का एक असंभव सा लगने वाला मिशन शुरू किया। 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' या जिसे बाद में 'ऑपरेशन एंटेबे' के नाम से जाना गया, इज़रायल की सायेरेट मतकल कमांडो इकाई द्वारा गुप्त रूप से चलाया गया। मेजर योनातन नेतन्याहू इस विशिष्ट बल के कमांडर थे। 3 जुलाई 1976 की रात को, इजरायली कमांडो सैन्य विमानों में युगांडा पहुँचे। उन्होंने हवाई अड्डे पर एक तीव्र और सटीक हमला किया।
इस बिजली जैसी कार्रवाई में, कमांडो ने बंधकों को सुरक्षित निकाला। उन्होंने अपहरणकर्ताओं और युगांडा के सैनिकों को बेअसर किया। योनातन नेतन्याहू ने व्यक्तिगत रूप से ऑपरेशन का नेतृत्व किया। वह बंधकों को बचाते हुए क्रॉसफायर में गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। यह मिशन भले ही सफल रहा, लेकिन योनातन का बलिदान इज़रायली राष्ट्र के लिए एक गहरा घाव था। कुल 102 बंधकों को बचा लिया गया था।
इतिहास और वर्तमान का जुड़ाव
इस प्रतिमा का अनावरण युगांडा और इज़रायल के बीच ऐतिहासिक संबंधों को भी उजागर करता है। प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई बार युगांडा का दौरा किया है। उन्होंने अपने भाई के बलिदान स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। यह घटना हमेशा दोनों देशों के बीच एक भावनात्मक सेतु का काम करती है। यह केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ निरंतर संघर्ष और उन लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक संदेश भी देता है: कि असाधारण परिस्थितियों में भी साहस और दृढ़ संकल्प जीत सकता है।
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