मुख्य बातें

  • संयुक्त अरब अमीरात में तेलंगाना के एक मजदूर को जेल हुई।
  • यह मामला एक पाकिस्तानी सहयोगी के कर्ज का है, जिसके लिए वह गारंटर बना था।
  • परिवार ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और रिहाई की गुहार लगाई है।

संयुक्त अरब अमीरात में काम करने गए तेलंगाना के एक मजदूर की जिंदगी मुश्किल में फंस गई है। अपने पाकिस्तानी सहकर्मी के लिए कर्ज का गारंटर बनना अब उसके लिए भारी पड़ गया है। यह व्यक्ति अब यूएई की जेल में बंद है, जबकि उसका सहयोगी गायब है।

कैसे फंसा मजदूर? कर्ज और भरोसे की कहानी

जानकारी के मुताबिक, तेलंगाना के निर्मल जिले से ताल्लुक रखने वाले कुम्मारी जगन कई सालों से संयुक्त अरब अमीरात में मजदूरी कर रहे थे। कुछ समय पहले उनके एक पाकिस्तानी सहकर्मी ने बैंक से लोन लेने की इच्छा जताई। जगन ने दोस्ती के नाते उस कर्ज के लिए गारंटर बनने पर हामी भर दी। यह एक सामान्य मानवीय कार्य लग सकता था, पर इसके परिणाम गंभीर निकले।

दुर्भाग्यवश, पाकिस्तानी नागरिक ने कर्ज की किस्तें चुकाना बंद कर दिया और फिर लापता हो गया। बैंक ने कर्ज वसूली के लिए जगन को जिम्मेदार ठहराया। यूएई के सख्त कानूनों के तहत, गारंटर को मूल कर्जदार के बराबर ही माना जाता है। नतीजतन, जगन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वह अब अपने किए हुए 'भरोसे' की कीमत चुका रहा है।

घर पर पसरा मातम: परिवार की गुहार

निर्मल में जगन का परिवार सदमे में है। उनकी पत्नी और बच्चे अपने घर के इकलौते कमाने वाले की रिहाई के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने भारतीय अधिकारियों, तेलंगाना सरकार और प्रवासी भारतीय संगठनों से मदद की अपील की है। परिवार का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रियाओं को समझने और जगन को बाहर निकालने के लिए आर्थिक रूप से अक्षम हैं। उनकी उम्मीदें अब केवल सरकार और प्रवासी समुदायों के समर्थन पर टिकी हैं।

यह घटना खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बिना सोचे-समझे किसी के लिए भी वित्तीय गारंटी देना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में कानूनी परिणाम बेहद कड़े होते हैं, और व्यक्तिगत स्वतंत्रता दांव पर लग सकती है। भारतीय दूतावास ऐसे मामलों में मार्गदर्शन प्रदान करता है, लेकिन प्राथमिक जिम्मेदारी व्यक्तियों की ही रहती है।

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