Key Highlights

  • यमन के हوثी विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने के सऊदी अरब के आरोप को 'झूठ' करार दिया।
  • सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने पवित्र शहर की ओर दागी गई एक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोका।
  • यह घटना यमन संघर्ष में क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ावा देती है।

सऊदी अरब के उस गंभीर आरोप को यमन के हوثी विद्रोहियों ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने इस्लामी दुनिया के सबसे पवित्र स्थल मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हوثी अधिकारियों ने इस दावे को 'बिल्कुल झूठ' और 'मनगढ़ंत' करार दिया है, जिससे यमन संघर्ष के इर्द-गिर्द क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है।

मक्का पर मिसाइल के दावे और हوثियों का कड़ा खंडन

रियाद ने दावा किया था कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने मक्का की दिशा में दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था। सऊदी प्रेस एजेंसी (एसपीए) ने इसकी सूचना दी थी, जिससे मुस्लिम जगत में व्यापक आक्रोश फैल गया। हालांकि, हوثी विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने तुरंत इस आरोप को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य कभी भी मक्का नहीं रहा और सऊदी अरब जानबूझकर स्थिति को गलत तरीके से पेश कर रहा है।

सच्चाई क्या है? हوثी दृष्टिकोण

हوثियों के अनुसार, उनकी कार्रवाई सऊदी अरब के किंग खालिद एयर बेस को निशाना बनाने के लिए थी, जो सऊदी राजधानी रियाद से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना उनकी नीति का हिस्सा है, न कि पवित्र धार्मिक स्थलों को। याह्या सारी ने यह भी कहा कि सऊदी गठबंधन अपने 'अपमानजनक अपराधों' से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे 'निराधार आरोप' लगा रहा है। यह आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में सामने आया है जब यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हوثी विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष जारी है।

क्षेत्रीय तनाव और पवित्र स्थलों की संवेदनशीलता

मक्का पर हमले का आरोप, भले ही बाद में खारिज कर दिया गया हो, एक संवेदनशील मुद्दा है। मक्का इस्लाम में एक अत्यधिक सम्मानित शहर है और किसी भी पवित्र स्थल पर हमले की बात पूरे मुस्लिम जगत में गंभीर प्रतिक्रिया को जन्म देती है। इस आरोप ने ईरान समर्थित हوثियों और सऊदी अरब के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में एक नया आयाम जोड़ दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यमन में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में है।

सऊदी अरब ने पहले भी हوثियों पर अपनी जमीन पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है, जिन्हें अक्सर सऊदी शहरों या तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, मक्का को निशाना बनाने का दावा एक नई और अधिक उत्तेजक रेखा खींचता है। हوثी नेतृत्व लगातार अपनी आत्मरक्षा की बात करता रहा है, जबकि सऊदी गठबंधन यमन में 'वैध सरकार' का समर्थन करने का दावा करता है।

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