Key Highlights

  • ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक ‘आतंकी’ समूह को निष्क्रिय किया।
  • दावा है कि इस समूह के अमेरिका और इजरायल से संबंध थे।
  • यह कार्रवाई दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में हुई।

ईरान में अमेरिकी-इजरायली ‘आतंकी’ टीम का खुलासा: सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई

ईरान के इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने देश के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में एक ऐसे ‘आतंकवादी’ समूह को सफलतापूर्वक ध्वस्त करने का दावा किया है, जिसके अमेरिका और इजरायल की खुफिया एजेंसियों से संबंध थे। इस कार्रवाई को ईरानी सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह समूह देश में अस्थिरता फैलाने की फिराक में था।

IRGC की ग्राउंड फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद पाकपौर ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में समूह के कई सदस्य मारे गए और कुछ को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस नेटवर्क का मकसद ईरान के भीतर अशांति पैदा करना था, विशेषकर सिस्तान-बलूचेस्तान प्रांत में।

हथियार और संचार उपकरणों की बरामदगी

अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, अत्याधुनिक संचार उपकरण और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं। पाकपौर ने बताया कि बरामद किए गए उपकरणों में से कुछ ऐसे थे जिनका उपयोग विदेशी जासूसी एजेंसियों द्वारा किया जाता है। यह बरामदगी इस बात की पुष्टि करती है कि समूह के पास महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच थी।

सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत ईरान के सबसे बड़े और सबसे कम विकसित प्रांतों में से एक है। इसकी सीमाएं पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लगती हैं। यह क्षेत्र अक्सर ड्रग तस्करों और सुन्नी विद्रोही समूहों द्वारा हमलों का शिकार रहा है, जो तेहरान में शिया सरकार के खिलाफ लड़ते हैं। IRGC का यह दावा क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा अभियानों का हिस्सा है।

💡 Did You Know? सिस्तान-बलूचिस्तान ईरान का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 181,785 वर्ग किलोमीटर है।

ईरान नियमित रूप से अमेरिका और इजरायल पर अपने देश में तोड़फोड़ और जासूसी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, वाशिंगटन और तेल अवीव इन आरोपों को अक्सर खारिज करते रहे हैं। IRGC के इस नवीनतम दावे से क्षेत्र में पहले से ही तनावपूर्ण माहौल और गरमा सकता है। इस तरह की कार्रवाईयाँ दोनों पक्षों के बीच चल रहे शीत युद्ध का हिस्सा मानी जाती हैं।

इस घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए सक्रिय है। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। इस खबर पर आगे की अपडेट्स के लिए Vews.in पर बने रहें।