ज़िंदगी का सफ़र

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: सफ़र, डगर, नज़र, ख़बर, हुनर, बसर, असर  |  Radeef: है
ज़िंदगी एक अनमोल सफ़र है, कभी धूप, कभी छाँव की डगर है। पल-पल में बदलती ये नज़र है, हर मोड़ पर नई एक ख़बर है। इसे जीना ही तो असली हुनर है, क्या खोया, क्या पाया, किसे ख़बर है? बस चलते रहना ही इसकी बसर है, यही ज़िंदगी का सच्चा असर है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: पहेली, सहेली, किनारा, सहारा, गँवारा, नज़ारा, आवारा  |  Radeef: नहीं
ये ज़िंदगी भी अजीब पहेली है, कभी शांत, कभी तूफ़ानी सहेली है। ढूँढे हर कोई इसका किनारा, पर मिलता किसी को सहारा नहीं। मुश्किलें झेलना किसे गँवारा, पर इसके बिना कोई नज़ारा नहीं। कभी हँसाती, कभी रुलाती, पर जीना छोड़ना गवारा नहीं। ये एक बहती नदी है, आवारा, जिसका कोई ठिकाना नहीं।