इश्क़ की गहराइयाँ
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: सदा, अदा, वफ़ा, खुदा, पता, दवा
Radeef: है
दिल में तेरे प्यार की एक मीठी सी सदा है।
हर अदा पे तेरी, ये जान फिदा है।
उम्र भर की चाहत, ये सच्ची वफ़ा है।
तू ही मेरा रब, तू ही मेरा खुदा है।
साँसों में मेरी बस तेरी ही हवा है।
बिन तेरे जीना, जैसे कोई सज़ा है।
ढूंढता है दिल तुझको, कहाँ तेरा पता है।
हर दर्द की अब तू ही तो दवा है।
हर अदा पे तेरी, ये जान फिदा है।
उम्र भर की चाहत, ये सच्ची वफ़ा है।
तू ही मेरा रब, तू ही मेरा खुदा है।
साँसों में मेरी बस तेरी ही हवा है।
बिन तेरे जीना, जैसे कोई सज़ा है।
ढूंढता है दिल तुझको, कहाँ तेरा पता है।
हर दर्द की अब तू ही तो दवा है।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: अफ़साना, दीवाना, ज़माना, फसाना, परवाना, निभाना
Radeef: जाना
इश्क़ का ये कैसा अजब है अफ़साना।
हर दिल को इसने कर दिया है दीवाना।
बदल दिया इसने सारा ज़माना।
हर बात में अब तेरा ही है फसाना।
जलता है दिल मेरा जैसे परवाना।
मुश्किल है अब बिन तेरे जी पाना।
ये वादा है मेरा, हर रिश्ता निभाना।
बस तेरी ही आँखों में है डूब जाना।
हर दिल को इसने कर दिया है दीवाना।
बदल दिया इसने सारा ज़माना।
हर बात में अब तेरा ही है फसाना।
जलता है दिल मेरा जैसे परवाना।
मुश्किल है अब बिन तेरे जी पाना।
ये वादा है मेरा, हर रिश्ता निभाना।
बस तेरी ही आँखों में है डूब जाना।