इश्क़ की रौशनी

Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: रौशनी, कहानी, निशानी, रवानी, ज़ुबानी, जिंदगानी

Radeef: है


हर सू बिखरी है अब इश्क़ की रौशनी,
ज़िंदगी बन गई एक मीठी कहानी है।
तेरी आँखों में देखी मैंने अपनी निशानी,
हर धड़कन में तेरी ही तो रवानी है।
लबों पर मेरे तेरा ही तो नाम है,
हर साँस में तेरी ही ज़ुबानी है।
ये कैसी मुहब्बत है, ये कैसा कमाल है,
मेरी हर सुबह तेरी ही जिंदगानी है।
'फ़ुरक़ान' की ग़ज़लों में तेरा ही ज़िक्र है,
हर शेर में तेरी ही तो निशानी है।



Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: तलाश, प्यास, उदास, एहसास, आस, लिबास, ख़ास

Radeef: है


जब से देखा है तुम्हें, दिल को तेरी तलाश है,
हर लम्हा अब तेरी ही तो मुझे प्यास है।
तेरे बिन सूनी हर राह, हर मंज़िल उदास है,
ये कैसा इश्क़ है, तेरा ही तो एहसास है।
तेरी चाहत में हर मुश्किल भी अब आसान है,
तेरी ही यादों में अब हर पल की आस है।
जो तू साथ हो, तो हर गम भी हसीन है,
तेरी मुहब्बत ही तो मेरा लिबास है।
'फ़ुरक़ान' लिखता है अब तेरे ही नग्मे,
तू ही तो मेरी ज़िंदगी का सबसे ख़ास है।