उदासी की चादर

Nazm By Furkan S Khan

Kaafiya: रात, बात, साथ, घात

Radeef: नहीं


एक उदासी की चादर है बिछी हर सू,
कोई खुशियों की किरण अब दिखती नहीं।
दिल में गहरे उतरती है ये गम की बात,
कोई उम्मीद की लहर अब उठती नहीं।
हर तरफ एक खामोशी का है गहरा साथ,
कोई धुन अब मधुर सी बजती नहीं।
ज़िंदगी ने दी है ऐसी ये गहरी घात,
कोई आरज़ू अब दिल में पलती नहीं।



Nazm By Furkan S Khan

Kaafiya: दर्द, सर्द, गर्द, हमदर्द

Radeef: है


ये खामोश आँसू जो बहते नहीं,
एक गहरा सा अंदरूनी दर्द है।
चेहरे पर मुस्कान तो है मगर,
रूह में बसी एक ठंडी सर्द है।
ज़िंदगी की राहों में बिखरी गर्द,
हर कदम पर एक नई ज़र्द है।
कोई समझे ना इस दिल का हाल,
कोई सच्चा कहाँ अब हमदर्द है।



Nazm By Furkan S Khan

Kaafiya: राह, चाह, आह, पनाह

Radeef: नहीं


टूटे ख्वाबों का एक लंबा सफर है,
मंज़िल की कोई उम्मीद अब रही नहीं।
दिल में जो कभी थी खुशियों की चाह,
वो लौ अब कहीं भी जल रही नहीं।
हर आह में छिपी है एक गहरी पुकार,
कोई सुनने वाला अब पास में नहीं।
इस बेदर्द दुनिया में कोई पनाह,
सुकून की कोई किरण अब दिख रही नहीं।