उम्मीद की लौ
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: राह, चाह, पनाह, गुनाह, निगाह, सुबह, गवाह
Radeef: है
हर मुश्किल में एक नई राह है,
दिल में जलती एक गहरी चाह है।
भटक न जाना अंधेरों में कहीं,
रोशनी की हरदम हमको पनाह है।
जो गिरे तो उठना सीख ले ऐ दोस्त,
हारना तो बस एक बड़ा गुनाह है।
देख अपनी आँखों में वो चमक,
तेरी मंज़िल तेरी ही निगाह है।
रात कितनी भी गहरी हो मगर,
आएगी एक दिन सुनहरी सुबह है।
तेरी हिम्मत ही तेरी पहचान है,
तेरे सपनों का तू ही गवाह है।
दिल में जलती एक गहरी चाह है।
भटक न जाना अंधेरों में कहीं,
रोशनी की हरदम हमको पनाह है।
जो गिरे तो उठना सीख ले ऐ दोस्त,
हारना तो बस एक बड़ा गुनाह है।
देख अपनी आँखों में वो चमक,
तेरी मंज़िल तेरी ही निगाह है।
रात कितनी भी गहरी हो मगर,
आएगी एक दिन सुनहरी सुबह है।
तेरी हिम्मत ही तेरी पहचान है,
तेरे सपनों का तू ही गवाह है।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: संभल, बदल, निकल, अटल, सफल, महल, अमल
Radeef: चल
ज़िंदगी की राहों में तू संभल-संभल चल,
वक़्त के हर मोड़ पर खुद को बदल-बदल चल।
जो गिरा है, फिर से उठने की हिम्मत रख,
मंज़िलों को पाने को बस तू निकल-निकल चल।
ख्वाब तेरे हैं, तो तू ही उन्हें पूरा कर,
अपने हर इरादे पर तू अटल-अटल चल।
काँटों भरे रास्ते भी फूल बन जाएँगे,
निश्चित है तेरी जीत, बस तू सफल-सफल चल।
दिल में जो आग है, उसे बुझने न दे,
अपने सपनों का बना ले तू महल-महल चल।
जो भी सीखा है तूने, उसे कर ले अमल,
हर कदम पर बस तू आगे निकल-निकल चल।
वक़्त के हर मोड़ पर खुद को बदल-बदल चल।
जो गिरा है, फिर से उठने की हिम्मत रख,
मंज़िलों को पाने को बस तू निकल-निकल चल।
ख्वाब तेरे हैं, तो तू ही उन्हें पूरा कर,
अपने हर इरादे पर तू अटल-अटल चल।
काँटों भरे रास्ते भी फूल बन जाएँगे,
निश्चित है तेरी जीत, बस तू सफल-सफल चल।
दिल में जो आग है, उसे बुझने न दे,
अपने सपनों का बना ले तू महल-महल चल।
जो भी सीखा है तूने, उसे कर ले अमल,
हर कदम पर बस तू आगे निकल-निकल चल।
Ghazal By Furkan S Khan
Kaafiya: मिटा, सिखा, दिखा, बढ़ा, उठा, चला
Radeef: जा
अपने अंदर के डर को अब तू मिटा जा,
ज़िंदगी का नया पाठ तू अब सिखा जा।
जो भी ख्वाब हैं तेरे, उन्हें पूरा कर,
दुनिया को अपनी पहचान अब दिखा जा।
राह में जो भी ठोकर लगे, सह ले तू,
अपने कदमों की रफ्तार को बढ़ा जा।
गिर के उठने में ही तो शान है तेरी,
हर मुश्किल से तू सर उठा जा।
नज़रें तेरी हों बस अपनी मंज़िल पर,
हर बाधा को पार कर तू चला जा।
जो भी करना है, उसे आज ही कर ले,
कल पर न छोड़, अब कर के दिखा जा।
ज़िंदगी का नया पाठ तू अब सिखा जा।
जो भी ख्वाब हैं तेरे, उन्हें पूरा कर,
दुनिया को अपनी पहचान अब दिखा जा।
राह में जो भी ठोकर लगे, सह ले तू,
अपने कदमों की रफ्तार को बढ़ा जा।
गिर के उठने में ही तो शान है तेरी,
हर मुश्किल से तू सर उठा जा।
नज़रें तेरी हों बस अपनी मंज़िल पर,
हर बाधा को पार कर तू चला जा।
जो भी करना है, उसे आज ही कर ले,
कल पर न छोड़, अब कर के दिखा जा।